राहु काल जिसे राहुकालम भी कहते हैं, एक ऐसा समय जिसमें कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए। ज्योतिष विज्ञान में राहु काल के समय के लिए गणनाएं कि जाती हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि साल के 365 दिन, हफ्ते के सातों दिन और दिन के 24 घंटों में राहु अपनी चाल चलता है।
भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों की मान्यता है। ये
ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरू, शनि, राहु और केतु। हिन्दू धर्म
शास्त्रों के मुताबिक राहु, राक्षसी सांप का मुखिया है जो कि सूर्य और चंद्रमा को
निगलते हुए ग्रहण का कारण बनता है। राहु तमस असुर है जिसका कोई सर नहीं है। आठ
घोड़ों के रथ पर राहु सवार रहता है।
शनि से भी घातक है राहु का प्रकोप
राहु का प्रकोप शनि से भी खराब माना जाता है। राहु की खराब दशा जब किसी पर पड़ती है तो
व्यक्ति की बुद्धि और विवेक दोनों का नाश होने लगता है। ज्योतिष के अनुसार
बुद्धि-विवेक नाशक राहु ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक पड़ता है। राहु ग्रह के साथ सबसे बुरी बात ये है
कि न चाहते हुए भी व्यक्ति बुरे काम करने के लिए बाध्य हो जाता है।
हिन्दू विधान के अनुसार राहु काल अशुभ माना जाता
है। इस काल में किसी भी प्रकार के शुभ काम को करने की मनाही रहती है। हम आपके
सामने सप्ताह के सातों दिनों के आधार पर राहुकाल के समय को बता हैं, जिससे आप के
शुभ कामों में किसी भी तरह का विघन्न न पड़ें और आप किसी भी तरह की परेशानी से दूर
रहें।
90 मिनट रोज रहता है राहुकाल
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सप्ताह के सातों दिन पड़ने वाला राहुकाल अनिष्ट कार्य
करवाने की प्रबल क्षमता रखता है। इसलिए सप्ताह के सभी दिन पड़ने वाले राहुकाल में
कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। राहुकाल प्रत्येक दिन 90 मिनट तक रहता है यानि
कुल मिलाकर डेढ़ घंटे की अवधि राहु काल की होती है। यह राहु काल की स्थिति स्थानीय
समय के अनुसार निर्धारित होती है।
आइये जाने किस समय इस काल से बचना चाहिए-
रविवार:-शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे तक
सोमवारः-सुबह 7:30 बजे
से 9:00 बजे तक
मंगलवारः- दोपहर 3:00 बजे
से 4:30 बजे तक
बुधवारः- दोपहर 12:00 बजे
से 1:30 बजे तक
गुरूवारः- दोपहर 01:30 बजे से 3:00 बजे तक
शुक्रवारः- सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे तक
शनिवारः- सुबह 09:00 बजे
से 10:30 बजे तक
राहुकाल में वर्जित कार्य
राहुकाल में किये गए कामों का विपरीत
प्रभाव पड़ता है।इसलिए इस समय कुछ काम नहीं करने चाहिए ।
जैसे..
इस काल में यज्ञ, पूजा, पाठ आदि नहीं करते हैं, क्योंकि
यह फलित नहीं होते हैं।
इस काल में नए व्यवसाय का शुभारंभ भी
नहीं करना चाहिए।
इस काल में किसी महत्वपूर्ण कार्य के
लिए यात्रा भी नहीं करते हैं।
यदि आप कहीं घूमने की योजना बना रहे
हैं तो इस काल में यात्रा की शुरुआत न करें।
राहु काल में विवाह, सगाई, धार्मिक कार्य या गृह प्रवेश जैसे कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करते
हैं।
इस काल में शुरु किया गया कोई भी शुभ
कार्य बिना बाधा के पूरा नहीं होता है।
राहुकाल कर सकते हैं ये काम और उपाय
· राहुकाल में अगर यात्रा करना हो तो घर
से निकलते वक्त मीठा या दही खाकर निकले, फिर
10 कदम उल्टा चलकर सीधा चले तो यात्रा फलित होती है।
· राहु ग्रह की शांति के लिए या दोष दूर
करने हेतु कर्मकांड मंत्र पाठ आदि किए जा सकते हैं।
· कालसर्प दोष की शांति के उपाय किए जा
सकते हैं।
· राहु का यंत्र धारण या राहु यंत्र
दर्शन कार्य भी किए जा सकते हैं।
· ध्यान, भक्ति के अलावा मौन रह सकते हैं।
· यदि कोई मंगलकार्य या शुभकार्य करना हो
तो हनुमान चालीसा पढ़ने के बाद पंचामृत पीएं और फिर कोई कार्य करें।
राहु के लिए असरकारक मंत्र है जरूरी
राहुकाल में एकाक्षरी बीज मंत्र- 'ॐ रां राहवे नम:। ' तांत्रिक मंत्र- 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः का
जप करना चाहिए


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