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सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राहु की नवग्रह में स्थापना का रहस्य और राहु के सारे नाम को जनिए

पौराणिक कथाओं में राहु के पिता का नाम विप्रचित्त और माता का नाम सिंहिका बताया गया है। दैत्य पुत्र अपनी माता के नाम से सौंहिकेय भी कहलाता था। इस दैत्य पुत्र की चार भुजाएं और एक पूंछ भी थी। समुद्र मंथन के बाद निकले अमृत की वजह और भगवान विष्णु की माया का प्रसंग आप सभी को मालूम ही होगा। अमृत पान के लिए राहु ने दैत्य से देवता का छद्म वेश धारण कर लिया और देवताओं की पंक्ति में जा बैठा। उसने कुछ अमृत भी लिया लेकिन सूर्य और चन्द्रमा ने उसका भेद उजागर कर दिया। विष्णु ने उसी वक्त उसके शरीर से मस्तक को सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया और उसकी भुजाएं भी काट डाली। अमृत पान की वजह से वह मारा तो नहीं गया लेकिन उस समय से ही स्वर्भानु अमर हो गया और तारा मंडल में विशेष स्थान पा कर विश्व विख्यात हो गया। उसके शीश और धड़ दोनों ही जीवित माने जाते हैं। इसका सिर राहु कहलाया और धड़ को केतु के रूप में जाना जाता है। नवग्रहों के रूप में राहु-केतु की स्थापना कैसे हुई ? पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु का मस्तक काटा तो राहु का सिर वहीं रह गया और उसका धड़ गौतमी नदी के पास आकर गिर गया। अमृत...

नौ ग्रह की मान्यता के साथ जानें उनके पद-कार्य का अंतर

हमारे शरीर में सभी नौ ग्रहों के तत्व मौजूद रहते हैं। ग्रह और देव में फर्क भी होता है, लेकिन देवी या देवता ग्रहों के गृहपति माने गये हैं। इसीलिए प्राचीन काल में सभी के कार्य नियुक्त कर दिये गये थे। हम आपको बताते हैं पौराणिक कथाओं में नवग्रहों को किस प्रकार की शक्तियां या पद प्रदान किये गये हैं।  शास्त्रों के मुताबिक मान्यता है कि सूर्य राजा, बुध मंत्री, मंगल सेनापति, शनि न्यायाधीश और राहु-केतु प्रशासक हैं। इसी प्रकार गुरू अच्छे मार्ग के प्रदर्शक, चंद्र माता और मन का प्रदर्शक, शुक्र है- पति के लिए पत्नी और पत्नी के लिए पति तथा वीर्य बल।  जब समाज में कोई व्यक्ति अपराध करता है तो शनि के आदेश के आधार पर ही राहु और केतु उसे दंड देने के लिए सक्रिय हो जाते हैं।
ज्योतिष एक विज्ञान है और इसी विज्ञान से जुड़ा रहता है हमारा भूत, भविष्य और वर्तमान। एक डॉक्टर आप को सिर्फ दवाई देकर शारीरिक कष्टों से मुक्ति दे सकता है लेकिन जीवन के कई ऐसे पहलू होते हैं जिन्हें ज्योतिष समाधान की जरूरत अवश्य होती है, तो इस ब्लॉग के माध्यम से आज कुछ ऐसे ही उपाय-समाधान आपको हम बताने जा रहें हैं, जिसको करने के बाद आप की मनोकामना जरूर पूरी होगी। सभी जानना चाहेंगे कि जीवन में सफलता कैसे अर्जित करें। मतलब की लाख कोशिशों के बाद हम पढाई और अच्छी नौकरी पाने में कहीं न कहीं असफल हो जाते है तो अगरकुछ छोटी सी चूकों को दूर कर दिया जाय तो सफलता आपके कदम चुमेंगी।इसके लिए आपको सरल और अचूक ज्योतिषीय उपाय करने होंगे जो आपको सफलता जरूर दिलायेंगे। गणपति जी दूर करेंगे नकारात्मकता घर के मुख्य द्वार पर अंदर और बाहर की दीवार पर गणपति जी की तस्वीर लगाएं। दोनों ही तस्वीर को ऐसे लगाएं की दीवार के आर-पार गणपति जी की पीठ आपस में सटी हो। याद रखें गणपति जी कि घर में   कितनी भी तस्वीर लगाएं , लेकिन पूजा एक ही की करें। मुख्यद्वार पर गणपति जी के होने से बाहर की नकारात्मकता अंदर नहीं आती और अ...

राखी बांधने का ये मंत्र है जरूरी, भाई की होगी लम्बी उम्र, बहनों की होगी इच्छा पूरी

रक्षा बंधन हर साल धूम-धाम से मनाया जाता है। भाई-बहन के पवित्र प्रेम को गहरा बनाने के लिए रक्षा बंधन के दिन इन शुभ मुहूर्तों में राखी बांधते वक्त थोड़े से उपाय आपकी मनोकामना पूरी करेंगे। राखी कौन से हाथ में बांधी जाती है राखी बांधते समय भाई को पूर्व दिशा बैठना चाहिए और बहन को पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके बैठना चाहिए। ऐसा करने से आपकी राखी को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होगा। राखी बांधते समय भाइयों के सिर पर रुमाल या कोई साफ कपड़ा रखना चाहिए। बहन भाई को चंदन और रोली का तिलक लगाएं और दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधे ।   राखी बांधते समय कौन सा मंत्र बोलें ॐ एन बद्धो बलि राजा , दानवेन्द्रो महाबली तेन त्वा मनुबधनानि रक्षे माचल माचल।। इस मंत्र का अर्थ है कि अर्थात् जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था , उसी रक्षाबंधन के पवित्र सूत्र को मैं तुम्हें बांधती हूं , जो तुम्हारी रक्षा करेगा। रक्षाबंधन का त्योहार है खास इन मंत्रों को बोलने से ईश्वरीय कृपा बरसती है।   मां लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर धर्म भाई बनाया था। ऐसा वर्णन पुराणो...

रोज रहता है राहु काल, अशुभ घड़ी को दूर कर देगा चमत्कारी मंत्र

राहु काल जिसे राहुकालम भी कहते हैं, एक ऐसा समय जिसमें कोई भी शुभ काम करने से बचना चाहिए। ज्योतिष विज्ञान में राहु काल के समय के लिए गणनाएं कि जाती हैं लेकिन क्या आपको मालूम है कि साल के 365 दिन, हफ्ते के सातों दिन और दिन के 24 घंटों में राहु अपनी चाल चलता है। भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों की मान्यता है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरू, शनि, राहु और केतु। हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक राहु, राक्षसी सांप का मुखिया है जो कि सूर्य और चंद्रमा को निगलते हुए ग्रहण का कारण बनता है। राहु तमस असुर है जिसका कोई सर नहीं है। आठ घोड़ों के रथ पर राहु सवार रहता है। शनि से भी घातक है राहु का प्रकोप राहु का प्रकोप शनि   से भी खराब माना जाता है। राहु की खराब दशा जब किसी पर पड़ती है तो व्यक्ति की बुद्धि और विवेक दोनों का नाश होने लगता है। ज्योतिष के अनुसार बुद्धि-विवेक नाशक राहु ग्रह का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर सबसे अधिक पड़ता है। राहु ग्रह के साथ सबसे बुरी बात ये है कि न चाहते हुए भी व्यक्ति बुरे काम करने के लिए बाध्य हो जाता है। हिन्दू विधान के अनुसार राहु काल अशुभ माना ...

हनुमानजी के मंगलवार से जुड़ी हैं 10 रोचक बातें

हिन्दू धर्म शास्त्रों में हर घड़ी और वार का विशेष विधान दिया गया है। पचांग के मुताबिक किसी भी कार्य का शुभारंभ करने से पहले तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को देखना बेहद जरूरी है। इसी से शुभ लग्न और मुहूर्त का पता लग जाता है। ज्योतिष विज्ञान में वार, तिथि, माह, लग्न और मुहूर्त से ही फलादेश की गणनाएं की जाती हैं। हिन्दू विधान में मंगलवार का दिन विशेष माना जाता है। आखिर क्या विशेषताएं हैं जो इस दिन को खास बनाती हैं। हम आपके सामने ऐसे 10 रोचक बातें लेकर आयें हैः- 1.    मंगलवार का दिन हनुमान जी का दिन है। मंगलवार की प्रकृति उग्र होती है। ज्योतिष विज्ञान के मुताबिक मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है और इनका वार भी मंगल ही है। अगर आपकी कुंडली में मंगल की स्थिति अच्छी है तो भाई, मित्र और रिश्तेदारों से आपके संबंध अच्छे रहेंगे और आपको उच्च पद भी प्राप्त होगा। जो भी मंगलवार को हनुमानजी की पूजा और व्रत करते हैं उन्हें कभी भी शनि का डर नहीं रहता है। 2.    स्कंदपुराण में मंगल की उत्पत्ति का विवरण मिलता है कि भगवान विष्णु के पसीने की बूंद से धरती द्वारा यह ग्रह अस्तित्व में...

राहुकाल क्या होता है? राहु कैसे डालता हैं हमारे जीवन पर प्रभाव?

राहु को एक पाप और क्रूर ग्रह माना जाता है। यह हर किसी के जीवन में अलग-अलग प्रभाव डालता है। ये ज्यादातर स्थितियों में विष घोलने का काम करता है। अधिकतर ग्रहों के साथ राहु की युति खराब होती है । जैसे - गुरु राहु चांडाल दोष , सूर्य राहु पितृ दोष , चन्द्र राहु ग्रहण दोष , शनि राहु शापित दोष , मंगल राहु अंगारक दोष बनाते है।  तभी तो ज्योतिष में राहु ग्रह को कठोर वाणी , जुआ , यात्राएं , चोरी , दुष्ट कर्म , त्वचा के रोग , धार्मिक यात्राएं आदि का कारक माना गया है। राहु ग्रह , कुंडली में स्थित 12 भावों पर  अलग-अलग प्रभाव डालता है। ऐसे में यह जिस व्यक्ति की कुंडली में अशुभ रहता है तो इसके नकारात्मक परिणाम मिलते हैं , लेकिन इसके विपरित जिस व्यक्ति की कुंडली में राहु ग्रह मजबूत होता है , उसे अच्छे परिणाम मिलते हैं। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल बनाता है। राहु ग्रह अपने मित्र ग्रहों के साथ बलवान होता है। लेकिन कुंडली में राहु की स्थिति कमजोर होने पर वह व्यक्ति को बर्बाद कर देता है। मतलब की कुंडली में राहु दोषित है तो व्यक्ति को बीमारी , अपयश , बदनामी , दुर्घटना और शत्रुओं की ओर...