राहु को एक पाप और क्रूर ग्रह माना जाता है। यह हर किसी के जीवन में अलग-अलग प्रभाव डालता है। ये ज्यादातर स्थितियों में विष घोलने का काम करता है। अधिकतर ग्रहों के साथ राहु की युति खराब होती है । जैसे - गुरु राहु चांडाल दोष, सूर्य राहु पितृ दोष, चन्द्र राहु ग्रहण दोष, शनि राहु शापित दोष, मंगल राहु अंगारक दोष बनाते है। तभी तो ज्योतिष में राहु ग्रह को कठोर वाणी, जुआ, यात्राएं, चोरी, दुष्ट कर्म, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राएं आदि का कारक माना गया है। राहु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग प्रभाव डालता है।
ऐसे
में यह जिस व्यक्ति की कुंडली में अशुभ रहता है तो इसके नकारात्मक परिणाम मिलते
हैं , लेकिन इसके विपरित जिस व्यक्ति की
कुंडली में राहु ग्रह मजबूत होता है, उसे
अच्छे परिणाम मिलते हैं। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक क्षेत्र में सफल बनाता है। राहु
ग्रह अपने मित्र ग्रहों के साथ बलवान होता है। लेकिन कुंडली में राहु की स्थिति
कमजोर होने पर वह व्यक्ति को बर्बाद कर देता है। मतलब की कुंडली में राहु दोषित है
तो व्यक्ति को बीमारी, अपयश, बदनामी, दुर्घटना और शत्रुओं की ओर से परेशान
का संकेत देता है।
आईये
जानते हैं राहु की महादशा का समय
राहु के नकारात्मक प्रभावों के चलते ही
राहु की महादशा से बच कर रहने की सलाह दी जाती है है। राहू की महादशा लगभग 18 वर्ष की होती है। राहू की अंतर्दशा का
काल 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है।
अगर राहू में शनि की अंतर्दशा चल रही
हो तो परिवार में कलह की स्थिति बनती है।
वैवाहिक जीवन में तलाक, भाई-बहन
और संतान से अनबन, नौकरी में संकट की संभावना रहती है।
राहु
में शनि की अंतर्दशा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र के जप स्वयं या किसी योग्य
विद्वान ब्राह्मण से कराना चाहिए। साथ ही काले तिल से शिव का पूजन करना चाहिए।
आईये
जानते हैं कि क्या है राहु से बचने के उपाय
राहु के कुप्रभाव से बचने के लिए भगवान गणेश जी के शतनाम पाठ के साथ दूर्वा चढ़ानी चाहिए। भैरव मंदिर में ध्वजा लगाना चाहिए। काले कुत्तों को रोटी, ब्रेड या बिस्कुट खिलाना चाहिए। शिव मंदिर में नंदी की पूजा करना और वस्त्र आदि दान देना सही रहता है। हर सोमवार को भगवान शिव का शुद्ध दूध से अभिषेक करना चाहिए। इसके अलावा राहु की दशा आने पर व्यक्ति को किचन में जहां खाना बनता है वहीं जमीन पर बैठकर खाना, खाना चाहिए। राहु से प्रभावित लोगों को बीमारी, अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है।
राहू
काल में भगवान शिव के रौद्र अवतार भगवान भैरव के मंदिर में रविवार को प्रसाद
चढ़ाने और तेल का दीपक जलाने से ग्रह दशा के दोषों से काफी हद तक शांति मिलती है।
राहु की खराब दशा से बचने के लिए शराब से दूर रहना चाहिए। साथ ही शमशान में
लकड़ियों का दान करना उचित माना गया है ।
ॐ
कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।।
राहु
का तांत्रिक मंत्र
ॐ
रां राहवे नमः।।
राहु
का बीज मंत्र
ॐ
भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।।
राहु
दोष होने पर व्यक्ति को गोमेद रत्न पहनना चाहिए, लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि राहु की दशा अच्छी या बुरी है इसके
बारे में किसी जानकार की सलाह लेना बेहद जरूर है। सलाह के बाद किये गये उपायों को
करने से पूर्ण फल मिलता है। राहु
व्यक्ति को रंक से राजा भी बना देता है।
राहु भी डालता हैं अच्छा
प्रभाव
राहु
की महादशा में बुध की अंतर्दशा की अवधि हो तो धन और पुत्र का योग बनते हैं। राहु
और बुध की मित्रता के कारण मित्रों का सहयोग मिलता है। साथ ही कार्य कौशल और
चतुराई में वृद्धि होती है। व्यापार का विस्तार होता है और मान, सम्मान यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति
होती है।
कहते
है कि राहु में देव और राक्षस दोनों के गुण मौजूद हैं, क्योंकि अमृत चखने की वजह से राहु कुछ स्थितियों
में अच्छा असर डालते हैं। इसलिए कभी-कभी आप सुनते भी होंगे कि किसी को अचानक लाटरी निकल गयी, या मकान खोदने पर गड़ा हुआ धन निकला, या फिर राजनीति या किसी संस्था में
व्यक्ति अचानक ऊँचे पद पर पहुंच गया, ये सब राहु की कृपा से होता है।
जब
शनि शुभ हो, और राहु भी शुभ हो तो समय बदलते देर नहीं लगती । राहु के प्रभाव से
रंक रहें इंसान के पास चाय पीने को रूपये नहीं रहते वो राहु की कृपा दृष्टि पाने
पर करोड़ो की सम्पत्ति का मालिक बन जाता है। अगर राहु शुभ स्थिति अभिनय के क्षेत्र
में जुड़े लोगों पर रहती है तो वो दुनिया भर में अच्छा नाम कमाते हैं।
नवग्रहों
में राहु का स्थान खास है। उनकी पूजा के बिना नवग्रहों की पूजा अधूरी है। इसलिए
जीवन में सफल बनाने के राहु को प्रसन्न करना जरूरी है। मतलब राहु राज भी कराते है
और कष्ट भी देतें हैं।

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