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महाभारत में शिखंडी के रहस्य को विज्ञान ने सुलझाया, जानिये शिखंडी से मिलते जुलते लोगों के बारे में

आज के ब्लॉग में हम सबसे पहले बात करने जा रहें है, महाभारत के प्रमुख पात्र शिखंडी की। हम सभी को मालूम है कि महाभारत के सबसे रोचक प्रसंग में से एक है शिखण्डिनी का जन्म है जो कि एक स्त्री के रूप में हुआ था। महाराजा द्रुपद की पुत्री जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ भीष्म का वध करना था। पहले जन्म की अम्बा जो कि पुनर्जन्म में भी प्रतिशोध की आग से जल रही थी, एक स्त्री के रूप में पैदा हुई। भगवान शिव से मिले वरदान का ही प्रताप था कि वह स्त्री, बाद में पुरूष बनने लगी और जिसकी वजह से ही इच्छा मृत्यु प्राप्त भीष्म का वध हो सका और महाभारत पांडवों के पक्ष में रहा। ग्रन्थों में पुरूष बने शिखंडी की पत्नी का भी जिक्र मिलता है।




दुनिया में तमाम लोग इस प्रसंग को सिर्फ कोरी कल्पना ही मानते हैं लेकिन अगर आप हमारे इस वीडियो को आगे देखेंगे तो आप को भी यकीन हो जायेगा कि यह प्रसंग कोई कोरी कल्पना नहीं बल्कि नियति का एक ऐसा सच है जिससे कई लोग आज भी जुड़े हैं।



आस्ट्रेलियाई ब्लॉक बस्टर फिल्म प्रीडेस्टीनेशन को देख कर ऐसा लगता है कि जैसे शिखंडी के चरित्र को ही दर्शाया गया है। एक स्त्री के रूप में पैदा लड़की एक दुर्लभ बिमारी की वजह से पुरूष बन गयी। यह फिल्म 1959 में लिखी गयी एक शार्ट स्टोरी पर आधारित थी। फिल्म में Fantasy  हो सकती है लेकिन क्या आप ये नहीं जानना चाहेंगे कि वैज्ञानिकों ने भी शिखंडी जैसे व्यक्ति को कब ढूंढा


हम आपको बताते हैं....फ्रांस में हरक्यूलिन बार्बिन नाम की लड़की का जन्म 8 नवम्बर, 1838 को हुआ। अपने जीवन के 20 सालों तक वह एक आम लड़की की तरह रही। लेकिन ठीक 21वें साले में उसकी दाढ़ी मूंछ उगना शुरू हो गयी। कमर के निचले हिस्से में दर्द होने पर जब उसकी जांच डॉक्टरों ने कि तो वो भी हैरत में पड़ गये। उसके शरीर में लड़कों वाले अंग विकसित होने लगे थे। इससे पहले सिर्फ भारतीय पौराणिक कथाओं में ही इस तरह के घटनाक्रम में शिखंडी का जिक्र है लेकिन मेडिकल साइंस में हरक्यूलिन बार्बिन पहला केस है, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में स्त्री से पुरूष माना गया है और उसका नाम बदलकर ऐबिल बार्बिन किया गया।




शिखंडिनी के शिखडी बनने के रहस्य पर से मेडिकल साइंस परते खोल रहा है। उन्होंने जन्म के बाद लिंग में बदलाव होने को एक अत्यंत दुर्लभ बिमारी यानि Rare Medical Condition में रखा है और इसे 5-ARD यानि 5-Alfa Reductase (रीडस्कटेस) Deficiency रखा है। इस दुर्लभ बिमारी में एक स्वस्थ लड़की बिना किसी सर्जरी के जीवन के कुछ सालों के बाद लड़का बनने लगती है। मेडिकल साइंस की इस खोज के बाद पूरी दुनिया में ही शिखंडी जैसे व्यक्तियों के मिलने का सिलसिला जारी है।  

भारतीय धर्म पुराणों से जुड़े ऐसे कई तथ्यों और रहस्यों को हम आगे कई स्टोरीज के माध्यम से भी बताने की कोशिश करेंगे। तथ्यों पर आधारित हमारे इस कहानी पर आप भी अपनी प्रतिक्रिया कमेंट जरूर भेजें।  

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